महावीर का पलना - - झूला झूले.....

महावीर का पलना - झूला झूले.....

झूल रहा त्रिशला का लाल, सुनहरे पलने में।

सुनहरे पलने में, रत्नों के पलने में।

रत्नों पलने में, पन्नों के पलने में।

पन्नों के पलने में, मणियों के पलने में।

मणियों पलने में, हीरे के पलने में।

झूल रहा त्रिशला का लाल, सुनहरे पलने में।.....

त्रिशला तेरे लालन की अजब बहार है,

चंदा जैसा मुखड़ा, किरण जैसा हार है।।

झूल रहा त्रिशला का........

माता त्रिशला ने (हाँ जी), सोलह स्वप्नों में (हाँ जी),

एक बैल देखा (हाँ जी), एक हाथी देखा (हाँ जी),

चन्द्रमा देखा (हाँ जी), मछली का जोड़ा (हाँ जी),

सिंहासन देखा (हाँ जी), जलमग्न सरोवर (हाँ जी),

कुछ और भी देखा (हाँ जी), रानी ने देखा (हाँ जी)।

रानी तेरे गर्भ से इक सुन्दर पुत्र होगा।

तीन लोक का राजा, वो तेरा पुत्र होगा।।

झूल रहा त्रिशला का........

फिर घड़ियाँ बीती (हाँ जी), फिर चैत महीना (हाँ जी),

प्यारी शुभ तेरस (हाँ जी), माता त्रिशला ने (हाँ जी),

एक बालक जनमा (हाँ जी), रत्नों की वर्षा (हाँ जी),

फिर देव आए (हाँ जी), शचि देवी आई (हाँ जी),

सौधर्म भी आया (हाँ जी), इन्द्राणी आई (हाँ जी),

वो बालक ले गई (हाँ जी), पाण्डुक शिला पर (हाँ जी),

बालक को नहला के (हाँ जी), वो वापिस आई (हाँ जी),

थी चारों ओर ख़ुशियाँ, थी चारों ओर ख़ुशियाँ,

झूल रहा त्रिशला का........

जय त्रिशलानन्दन (हाँ जी), मेटो भव बंधन (हाँ जी),

तेरी महिमा सुनकर (हाँ जी), जग मंदिर पहुँचा (हाँ जी),

तेरा मुखड़ा देखा (हाँ जी), मुझे हुआ अचंभा (हाँ जी),

मैंने ये जाना (हाँ जी), हिंसा न करना (हाँ जी),

चोरी से डरना (हाँ जी), तूने ये बताया (हाँ जी),

मेरी समझ में आया (हाँ जी),

महिला मण्डल कहता है, पार करो नैया,

दुनिया में कोई न मेरा खिवैया।

झूल रहा त्रिशला का.......

ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। 

सरिता जैन 
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका 
हिसार 🙏🙏🙏
 विनम्र निवेदन 
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धन्यवाद

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