मिलती है साधुओं की संगत
मिलती है साधुओं की संगत
तर्ज़ - होती है ज़िन्दगी में.....
मिलती है साधुओं की संगत कभी-कभी,
चढ़ती है मन पे धर्म की रंगत कभी-कभी।
निर्धन के घर शहंशाह, मुश्किल से आते हैं,
नदियों पे जैसे हंस के दर्शन कभी-कभी। मिलती है...
आए उदय में भाग्य तो, मिलते महात्मा,
जी भर के कर लो दोस्तों, संगत कभी-कभी। मिलती है...
बन्दे को रहना चाहिए, ऐबों से दूर ही,
दलदल में ले के डूबती, कुसंगत कभी-कभी। मिलती है...
गुरु की शरण में आकर, कर लो सफ़ल जन्म,
मिलती है आदमी को संगत कभी-कभी। मिलती है...
।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
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