मुझे अपनी शरण में ले लो
मुझे अपनी शरण में ले लो
मुझे अपनी शरण में ले लो, कि मैं तो आया तेरी शरणा, महावीर जी।
मैंने सारे द्वारे देखे, कोई मिला न दुखड़े मिटा दे,
कि दुखड़ों से छुट्टी कर दो, महावीर जी।
अपने चरणों में थोड़ी सी जगह दे दो, ये गरीब की है विनती कृपा हो,
कि नज़रें मेहर कर दो, महावीर जी।
मैंने भव-2 के चक्कर खाए हैं, इन चक्करों में बड़े दुख पाए हैं,
कि चक्करों की डोर काट दो, महावीर जी।
तेरे दर पे इक आया सवाली, इस दर से गया न कोई खाली,
कि मेरी भी झोली भर दो, महावीर जी।
और कहीं कैलाश नहीं जाना, सारी उम्र यहीं पे गुजारना,
बाकी भी यहीं पूरी कर दो, महावीर जी।
।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
द्वारा - सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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