मुझे मिले मेरे भगवान

मुझे मिले मेरे भगवान

सरिता जैन, सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका, हिसार की लेखनी द्वारा


Sung by Bindu Jain,Delhi

मुझे मिले मेरे भगवान, मन के मन्दिर में,

मुझे मिल गया सच्चा ज्ञान, मन के मन्दिर में।


जिसको ढूंढ रही थी जग में, छुपा हुआ वो मेरे मन में,

वो तो बैठे घर कर ध्यान, मन के मन्दिर में। मुझे...


मन-मन्दिर का द्वार बंद था, दुर्व्यसनों का ताला जड़ा था,

कैसे दर्शन हों भगवान, मन के मन्दिर में। मुझे...


मन-मन्दिर में धूल जमी थी, माया-मोह की गर्द चढ़ी थी,

मैंने आँगन दिया बुहार, मन के मन्दिर में। मुझे...


तप के जल से मैल निकाला, अन्तर दीप से किया उजाला

तब दर्श हुए भगवान मन के मन्दिर में। मुझे — 


 तुझ में मुझ में भेद नहीं था, मैं ही जग के भ्रम में पड़ा था, 

मैंने पाया जगत निःसार, मन के मन्दिर में। मुझे —


 जग को भूल के तुम को ध्याया, अपने अन्दर तुमको पाया, 

मुझे मिला आनन्द अपार मन के मन्दिर में। मुझे — 


जगत लगे मुझे झूठा सपना, तू मुझको लागे है अपना, 

मैं तो करूँ तेरा गुणगान मन के मन्दिर में। मुझे — 


मुझ को तुम हरगिज न भुलाना, अंत समय में पास बुलाना, 

दो मुझे यही वरदान मन के मन्दिर में। 

मैं तो जपूं सुबह और शाम मन के मन्दिर में, मुझे —

।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

द्वारा - सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

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