पंचकल्याणक- हिसार (हरियाणा)

 पंचकल्याणक (श्री 1008 भगवान मल्लिनाथ) 

(छोटा मन्दिर जी, गांधी चौक)

9 नवम्बर 2017 - 15 नवम्बर 2017

हिसार (हरियाणा) की पावन धरा



तर्ज़ - बस्ती-बस्ती, पर्वत-पर्वत गाता जाए बंजारा......

गली-गली और कूचे-कूचे, गाता जाए बंजारा, सब देखो भव्य नज़ारा........

मल्लिनाथ का पंचकल्याणक, सफल हुआ है हमारा, सब देखो भव्य नज़ारा........2

सौधर्म इंद्र और सभी देवगण, हर्षित हुए हैं भारी,

सारे नगर ने अहोभाव से, कर ली सब तैयारी। गली-गली और ..............

मिथिला नगरी की संरचना, आभा अति मनोहारी,

पूजा, हवन और प्रवचन सुन, हर्षित हैं नर-नारी। गली-गली और ..............

नगर-नगर से बैण्ड हैं आए, बग्घी शोभाकारी,

देव कुबेर के रत्नों की वर्षा, हुई अति सुखकारी। गली-गली और ..............

मल्लिनाथ भगवान के अतिशय, मनती रोज़ दीवाली,

नगरी की शोभा अनुपम थी, सुरभित क्यारी-क्यारी। गली-गली और ..............


मुनि विरंजन सागर जी ने अतिशय पुण्य कमाया,

आचार्य श्री विराग सागर को, संघ सहित है बुलाया। गली-गली और ..............

संत समागम, धर्म की चर्चा, था अद्भुत ये नजारा,

‘कालिदास संत’ ने ‘धन्ना, ते भगवंता’ उचारा। गली-गली और ..............


आचार्य श्री ने किया विमोचन, ज्ञान प्रकाश फैलाया,

माता जी को दीक्षा देकर, तप का अलख जगाया। गली-गली और ..............

पाषाण बने ‘भगवान’ यहाँ पर, था वो क्षण हितकारी,

गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान, मोक्ष की, महिमा थी अति न्यारी। गली-गली और ..............

नगर-नगर, जन-जन के मुख पर, जयकारा गुरुदेव का,

हाथी, घोड़े, कलश-यात्रा, मन पुलकित हर एक का। गली-गली और ..............

मल्लिनाथ विराजे रथ में, शोभा वरणी न जाए,

सबके मन में यही भावना, हम भी यह पथ अपनाएं।

गली-गली और कूचे-कूचे, गाता जाए बंजारा, सब देखो भव्य नजारा.........-2

शब्द-संयोजक: सरिता जैन (सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका, हिसार)

रचनाकार: जिनेन्द्र कुमार जैन (हरियाणा कॉन्कास्ट), हिसार

।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

द्वारा -सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

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