प्रभु गुणगान

 प्रभु गुणगान

धुन- तुम दिल की धड़कन हो..........

हे प्रभुवर धन्य हो तुम, निज में ही रहते हो।

निज स्वरूप को दर्शाते, ज्ञायक में ही रहते हो।

तुम जैसा बन जाऊँ, सम्यक् दर्शन पा जाऊँ।.......

वीतराग छवि प्यारी है, जग जन को मनहारी है।

समता पाठ पढ़ाती है, ज्ञान की याद दिलाती है।

निज स्वरूप में जाना है, शुद्धातम में रहना है।

तुम जैसा बन जाऊँ, सम्यक् दर्शन पा जाऊँ।.......

ऐसा ही प्रभु मैं भी हूँ, ये प्रतिबिम्ब भी मेरा है।

भली भांति है पहचाना, ऐसा रूप ही मेरा है।

अब न ये ग़लती करना, निज में ही दृष्टि करना है।

तुम जैसा बन जाऊँ, सम्यक् दर्शन पा जाऊँ।.......

ध्रुव दृष्टि प्रकटी मुझमें, अब ध्रुव में ही स्थिरता हो।

ज्ञेयों में उपयोग न जावे, ज्ञायक में ही रमता हो।

अब नहीं पर में जाना है, निज में ही रम जाना है।

तुम जैसा बन जाऊँ, सम्यक् दर्शन पा जाऊँ।.......

जैसा प्रभु का रूप है, वही स्वरूप ही मेरा है।

परमपार अमिट अविकारी, वही स्वरूप ही मेरा है। 

मोक्षपुरी में चलना है, शिव रमणी को वरना है।

तुम जैसा बन जाऊँ, सम्यक् दर्शन पा जाऊँ।....... 

।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

विनम्र निवेदन

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