सांवलिया पारसनाथ
सांवलिया पारसनाथ
जय पारस जय पारस जय पारस देवा
ऊँचे पर्वत वाला, सबसे निराला
सांवलिया पारसनाथ शिखर पर भले विराजे जी।
भले विराजे जी, शिखर पर भले विराजे जी। सांवलिया पारसनाथ.....
टोंक टोंक पर ध्वजा विराजे, झालर घण्टा बाजे।
घण्टे की घननाद घनाघन, अनहद बाजा बाजे जी। सांवलिया पारसनाथ.....
दूर दूर से यात्री आवें, मन में लेकर चाव।
अष्ट द्रव्य से पूजा कीनी, मनवांछित फल पावे जी। सांवलिया पारसनाथ.....
काली काली भीलनी आवें, जिनकी लंबी चोटी।
जिसके मन दया धर्म नहीं है, उसकी किस्मत खोटी। सांवलिया पारसनाथ.....
ऊँचा नीचा पर्वत सोहे, जहाँ भीलों का वास।
उसी जगह से प्रभु मोक्ष गए, वहीं से लिया निवास।। सांवलिया पारसनाथ.....
।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
विनम्र निवेदन
यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें।
धन्यवाद
Comments
Post a Comment