सिद्धार्थ के नंदन

सिद्धार्थ के नंदन 

सिद्धार्थ के नंदन, तुम को शत शत वंदन, हो हमारा,

जो-२ आया शरण में है तारा।

हम तो आए हैं शरण तिहारी, जग में और नहीं संकटहारी,

ना हो कर्म बंधन, मुक्ति पथ पर गमन, हो हमारा। 

जो-२ आया शरण में है तारा।

कुंडलपुर में थे आप पधारे, त्रिशला माता के सुत प्राण प्यारे,

भोग नाही गहे, ब्रह्मचारी रहे संयम धारा। 

जो-२ आया शरण में है तारा।

भेद ज्ञान था उर में समाया, निज का पुरुषार्थ निज में जगाया,

केवलज्ञानी भये, गुण न जाते कहे, इन्द्र हारा। 

जो-२ आया शरण में है तारा।

जग में हिंसा की होली मची थी, भोली जनता भी उसमें फंसी थी,

करुणा फैला तभी, भव्य तारे सभी, दे सहारा। 

जो-२ आया शरण में है तारा।

सन्मति कर जोड़ नमता चरण में, 

वीर ‘पर’ तज लखूं निज को निज में,

ब्रह्म निश्चय पले, कर्म बंधन टले, ध्येय सारा। 

जो-२ आया शरण में है तारा।

।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

द्वारा - सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

विनम्र निवेदन

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