तीन भुवन के स्वामी मेरे

 तीन भुवन के स्वामी मेरे 



तीन भुवन के स्वामी मेरे, आया सुखद सवेरा,

आनंद उर न समाए प्रभुवर, दर्शन पाया तेरा  - २

 वीतराग सर्वज्ञ प्रभु हम, सुनी नहीं जिनवाणी,

कर्ता धर्ता तुमको माना, कर बैठा नादानी, - २

तुम तो स्वामी गुरु जगत के, दूर हुआ तम मेरा,

आनंद उर न समाए --------

२) कण कण है स्वाधीन जगत का, तुमने प्रभु बतलाया,

 निज पर के कर्तापन का भ्रम, जिनवर दूर भगाया, - २

   सर्व विपद को दूर करे यह, जिनवर दर्शन तेरा, 

आनंद उर न समाए ---------

३) तन मन कर्म रंग रागादिक, देते भिन्न दिखाई,

सम्यक ज्ञान कला उर जागी, निज प्रभुता मैं पाई - २

     शुद्ध स्वरूप अगोचर तेरा, सफल हुआ भव मेरा 

आनंद उर न समाए--------

४) सम्यक हुई प्रतीति प्रभुवर, तुम सम ही प्रभु मैं हूं,

 हूँ गुण धाम सहज अभिराम, आनंद धाम सदा हूँ - २

निज में ही ध्याऊं मैं तुमको, अभिनंदन है तेरा ,

आनंद उर न समाए --------।

।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

द्वारा - सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

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