तीर्थंकर पद
तीर्थंकर पद
आओ सुनाएं तुमको श्रोता, तीर्थंंकर पद क्या है होता,
जो भी इसको पाना चाहते, सोलह कारण भावना भातें,
तीर्थंकर का देते परिचय, जन्म समय के हैं दस अतिशय ,
विशेषता ये क्या रखते हैं, इनका वर्णन हम करते हैं ,
इतना सुंदर लगता प्रभुजन, जनमन को होता आकर्षण,
सुडौल अद्भुत रूप तुम्हारा, वज्र वृषभ संहनन को धारा ,
नख केशों की वृद्धि रुकी है, इंद्र मुकुट की मणियां झुकी हैं,
आंखों की पलकें ना झपकें, चेहरे से बस समता झलके ,
स्वेद कभी नहीं आता तुमको, देख के अचरज होता हमको,
सामुद्रिक शुभ लक्षण वाला, तीर्थंकर का रूप निराला,
चिह्न बने अठ एक सहस्त्र, जिनको पहचाने हैं इंद्र ,
श्वेत रक्त है क्षीर समान, तभी तो कहलाते भगवान,
जिनमें होता है अतुलित बल, निहार न करते, तन है निर्मल,
सौम्य कांति है इतनी उज्ज्वल, सुगंध फैले है अंबर तल,
वाणी में जिनकी रहे, हित मित वचन उदार,
तीर्थंकर जिन देव को ,वंदना बारंबार ,
आप महान ज्ञानी प्रभु, महिमा कही न जाए,
सूरज सम जिनवर प्रभु, दीपक क्या लिख पाए?
।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
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