उद्धार कैसे होता हमारा
उद्धार कैसे होता हमारा
तर्ज़-हमें और जीने की चाहत न होती...
उद्धार कैसे होता हमारा, अगर तुम न होते-2
गुरुजी तुम्हारा सहारा न मिलता, भंवर में ही रहते किनारा न मिलता।
दिखाई न देती अंधेरे में मंजिल, अगर तुम न होते-2................... ।
करके दरश तो लगता है ऐसे, महावीर फिर से आए हों जैसे।
पंचम काल के महावीर हो तुम, विराग सागर गुरुवर हमारे। उद्धार कैसे .......................... ।
दया इतनी कर दो हम पे गुरुवर, कल्याण होवे बनें आप जैसे।
बनें आप जैसे यही भावना है, यही भावना है यही चाहना है। उद्धार कैसे .......................... ।
।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
द्वारा - सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
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