वीरा तेरे चरणों को
वीरा तेरे चरणों को
वीरा तेरे चरणों को, कहां छोड़ कर जाना है ,
महावीरा तेरे चरणों को, कहां छोड़ कर जाना है ,
यह तन भी पराया है, एक दिन तो मिट जाना है
वीरा तेरे चरणों को ------
बचपन से जो जोड़ा था, सब यहीं रह जाना है,
धन दौलत और वैभव भी, साथ ना कुछ जाना है,
तेरे नाम का दीपक ही, अंत समय काम आना है,
महावीर तेरे चरणों को -------
जीवन की यह डोली भी, एक दिन उठ जानी है,
कर्मों की इस नगरी से, आत्मा तो उड़ जानी है,
तेरे बताए पथ पर ही, सच्चा घर पाना है,
महावीरा तेरे चरणों को------
राग द्वेष के बंधन सब, धीरे-धीरे तोड़ूं मैं,
तेरी भक्ति के रंग में, जीवन अपना जोड़ूं मैं
तेरे चरणों में ही प्रभु, खुद को अब खो जाना है,
महावीर तेरे चरणों को -------
अरिहंत तेरा दर ही, सच्चा एक ठिकाना है,
सिद्धों की इस नगरी में, आत्मा को जाना है,
तेरी कृपा से ही प्रभु, भवसागर तर जाना है,
महावीरा तेरे चरणों को------
जिनवाणी का अमृत प्रभु, मन में बसाना है ,
सम्यक दर्शन ज्ञान से, अज्ञान मिटाना है ,
कर्मों की इस जंजीर को, धीरे-धीरे तोड़ जाना है,
महावीरा तेरे चरणों को-------
नवकार मंत्र की शक्ति से, अंतर को जगाना है,
पंच परमेष्ठी चरणों में, शीश को झुकाना है ,
तीर्थंकर के पथ पर ही, मोक्ष धाम को पाना है,
महावीर तेरे चरणों को -------।
।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
द्वारा - सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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