आचार्य श्री विद्यासागर स्तुति
आचार्य श्री विद्यासागर स्तुति (पारुल जैन, दरियागंज, दिल्ली)
॥ आचार्य जिनसेनाचार्याय नमः ॥
विद्या गुरु, विद्या गुरु, विद्या गुरु, विद्या गुरु।
चरणों में त्रियोग से, वंदन करूँ विद्या गुरु ॥ -2
भगवान को देखा नहीं, पर देखा तुम को है गुरु।
'वीतरागी' के गुणों को, देख मैं पाया गुरु ॥ -2
भले नहीं सर्वज्ञ हो, पर ज्ञान निर्मल है गुरु।
अज्ञान तम सबका हटाते, सूर्य सम मेरे गुरु ॥ विद्या गुरु........
मोह गर्त से निकाले, निज से मिलवाते गुरु।
मन को ठंडे बस्ते में, रखना सिखाते हैं गुरु ॥ -2
थोड़ा-थोड़ा ग्रहण कर, ये ही बताते हैं गुरु।
जुड़ो नहीं जोड़ो नहीं, यही भाव सिखलाते गुरु ॥ विद्या गुरु........
मूक माटी के रचियता, मूक अब हो गए गुरु।
संलेखना कर उत्तम समाधि] धारण किए मेरे गुरु ॥
स्वात्मा में लीन हो, अब शांत हो गए मेरे गुरु। विद्या गुरु...........
यदि तेरा आशीष मिल जाए तो जीवन हो शुरू विद्या गुरु........
।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
द्वारा - सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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