मीठो-मीठो बोल

मीठो-मीठो बोल 

मीठो-मीठो बोल थारो कांई बिगड़े।

कांई बिगड़े थारो कांई बिगड़े। -2

आ जीवन मा दम नहीं। कब निकले प्राण मालूम नहीं।

मीठो-मीठो ...........................

सोच समझ ले स्वारथ रो संसार।

लाख जतन कर छूटे न घर बार।

तू जान ले, पहचान ले, अरे मान ले।

संसार किसी का घर नहीं। कब निकले प्राण मालूम नहीं।

मीठो-मीठो ...........................

युग-युग से गुरु कहते बारम्बार।

एक बार तू करले मन में विचार।

तू जान ले, पहचान ले, अरे मान ले।

संसार किसी का घर नहीं। कब निकले प्राण मालूम नहीं।

मीठो-मीठो ........................................

।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

विनम्र निवेदन

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