बधाई
बधाई
कहाँ सोवे महारानी लल्ला गोदी ले लेरी ।
गोदी ले लेरी अमृत घूंटी दे लेरी॥ कहाँ.....
घर घर नारी मंगल गावें,
सुर नर खग सब घूम मचावें ।
जग में हो रहा हल्ला,
लल्ला गोदी ले लेरी॥ कहाँ..... १
घड़ी आज से सुख की आई,
जल्दी उठकर जिनवर भाई।
भरवा अपना पल्ला, लल्ला गोदी ले लेरी॥ कहाँ.....२
कहीं रतन सुगन बरसाते
कहीं भिखारी भीख में पाते।
कंचन कपड़ा गल्ला,
लल्ला गोदी ले लेरी॥ कहाँ.... ३
जगत ‘सुमत’ शिव मग दर्शावें,
गेंद समान कर्म लुढ़कावें।
चार ज्ञान का बल्ला,
लल्ला गोदी ले लेरी॥ कहाँ..... ४।।
।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
द्वारा - सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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