पंच परम परमेष्ठी

पंच परम परमेष्ठी



ऐसे पंच परम परमेष्ठी देखे, 

हृदय हर्षित होता है।

आनन्द उल्लसित होता है। हो.............., 

सम्यक् दर्शन होता है।

 दर्श ज्ञान सुख वीर्य स्वरूपी, 

गुण अनंत के धारी हैं-2

जग को मुक्ति मार्ग बताते, 

निज चैतन्य विहारी हैं-2

मोक्ष मार्ग के नेता देखे,

विश्व तत्त्व के ज्ञाता देखे, 

हृदय हर्षित होता है।

आनन्द उल्लसित होता है।हो....................., 

सम्यक् दर्शन होता है।

 द्रव्य भाव नोकर्म रहित जो,

सिद्धालय के वासी हैं-2

आतम को प्रतिबिम्बित करते,

अजर अमर अविनाशी हैं-2

शाश्वत सुख के भोगी देखे,

योग रहित निज योगी देखे,

हृदय हर्षित होता है।

आनन्द उल्लसित होता है।

हो........, 

सम्यक् दर्शन होता है। 

साधु संघ के अनुशासक जो,

धर्म तीर्थ के नायक हैं-2

निज पर के हितकारी गुरुवर,

देव धर्म परिचायक हैं-2

गुण छत्तीस सुपालक देखे,

मुक्ति मार्ग संचालक देखे,

 हृदय हर्षित होता है।

आनन्द उल्लसित होता है।हो.............., 

सम्यक् दर्शन होता है।

 जिनवाणी को हृदयंगम कर,

शुद्धात्म रस पीते हैं-2

द्वादशांग के धारी मुनिवर,

ज्ञानानंद में जीते हैं-2

द्रव्य भाव श्रुतधारी देखे,

बीस पाँच गुणधारी देखे,

हृदय हर्षित होता है।

आनन्द उल्लसित होता है।हो.............., 

सम्यक् दर्शन होता है।

 निज स्वभाव साधनरत साधु

परम दिगम्बर वनवासी-2

सहज शुद्ध चैतन्यराज मय,

निज परिणति के अभिलाषी-2

चलते फिरते सिद्ध प्रभु देखे,

बीस आठ गुणमय विभु देखे,

हृदय हर्षित होता है।

आनन्द उल्लसित होता है।हो.............., 

सम्यक् दर्शन होता है।

पंच परम परमेष्ठी देखे-3

  ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

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