चरणों में तेरे भगवन्

चरणों में तेरे भगवन् 

तर्ज - होठों से छू लो तुम - - - - - -

चरणों में तेरे भगवन्, निज शीश झुकाऊँ मैं।

भक्ति में तेरी भगवन, निज मन को लगाऊँ मैं।

 हो आप वीतरागी, कैसे मनाऊँ भगवन्,

इच्छा तुम्हें न कुछ भी, क्या भेंट लाऊँ भगवन्,

श्रद्धा के फूल लाया, इनको ही चढ़ाऊँ मैं ॥

 इस जग के कण-कण से सुनता सुयश तुम्हारा,

पापी अधम औ अंजन तस्कर को तुमने तारा,

अपने दुष्कर्मों को, कहो कैसे मिटाऊँ मैं ॥

 नहीं रागी, नहीं द्वेषी, तुम हो दया के सागर,

मुझको भी पार कर दो भगवान अब कृपा कर,

सुनते तुम्ही हो भगवन, ओर किसको सुनाऊँ मैं ॥

।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

विनम्र निवेदन

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