चरणों में तेरे भगवन्
चरणों में तेरे भगवन्
तर्ज - होठों से छू लो तुम - - - - - -
चरणों में तेरे भगवन्, निज शीश झुकाऊँ मैं।
भक्ति में तेरी भगवन, निज मन को लगाऊँ मैं।
हो आप वीतरागी, कैसे मनाऊँ भगवन्,
इच्छा तुम्हें न कुछ भी, क्या भेंट लाऊँ भगवन्,
श्रद्धा के फूल लाया, इनको ही चढ़ाऊँ मैं ॥
इस जग के कण-कण से सुनता सुयश तुम्हारा,
पापी अधम औ अंजन तस्कर को तुमने तारा,
अपने दुष्कर्मों को, कहो कैसे मिटाऊँ मैं ॥
नहीं रागी, नहीं द्वेषी, तुम हो दया के सागर,
मुझको भी पार कर दो भगवान अब कृपा कर,
सुनते तुम्ही हो भगवन, ओर किसको सुनाऊँ मैं ॥
।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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