दरश गुरुदेव तेरा

दरश गुरुदेव तेरा 

तर्ज - बता मेरे यार सुदामा रे 

दरश गुरुदेव तेरा पाके, मोहे लगे सुहानी छाँव।

थारे ढिंग जब जब आया करता, आशीर्वाद मैं पाया करता। 

हूँ खुश आशीष तेरा पाके, मोहे ..........

जब जब देख्यो तोहे निकट से, मोहे बचावे हर संकट से। 

महिमा धन्य भयो गाके, मोहे ..........

जन मानस नै गुरु जगावे, रे मानव धर्म सबै सिखलावे। 

जनम भयो धन्य तुम्हें पाके, मोहे..........

जब जब होवे दर्शन तेरा, हो जाए धन्य ये जीवन मेरा। 

अंखियन की प्यास बुझे जाके, मोहे ..........

अब मैं आयो  ठीक बखत पे, प्रवचन दय्यो बैठ तखत पे। 

रिमझिम धरम नै बरसा के, मोहे ....... 

तुमरो साथ मोहे मिल जावै, रे नंगे पाँव चल्यो नहीं जावै। 

चरण पकड़ें हम घबरा के, मोहे ..........

।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

द्वारा - सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

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