गुरुवर तू है जग का नूर

 गुरुवर तू है जग का नूर 

तर्ज - तेरी दुनिया से दूर, चले हो के मजबूर।

गुरुवर तू है जग का नूर, तेरी ख्याति दूर-दूर, हमें याद रखना।

तुझको जाना है जरूर, हम तो श्रावक मजबूर, हमें याद रखना।

आएंगे जब मन्दिर तो, तेरी मीठी वाणी बुलाएगी हमें-2

सूना सिंहासन ये आँखें, हर पल हमें रुलाएगी हमें-2

रुलाएगी हमें, तड़पाएगी हमें-2 ...... 

गुरुवर तू है जग का नूर.... ॥

किसको पड़गाहूँ और किसको अब नमोस्तु, कहूँगा ये बता।

अत्रो-अत्रो कहकर के, विधि किसकी, मिलाऊंगा ये बता-2

बुलाएंगे किसे-2.......... 

गुरुवर तू है जग का नूर....॥

तेरी गुरु भक्ति और तेरी आनन्द यात्रा, मिलेगी अब कहाँ।

प्रवचन करती वाणी और वैय्यावृत्ति तेरी, मिलेगी अब कहाँ।

याद आएगी जहाँ-2, आँसू बहेंगे वहाँ..... 

गुरुवर तू है जग का नूर..... ॥

जाते हो तो जाओ, पर वापस आने का, इशारा तो करो।

इस तरह हमको छोड़कर गुरुवर, बेसहारा न करो-2

बेसहारा न करो, इशारा तो करो-2.........

गुरुवर तू है जग का नूर..... ॥

।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

विनम्र निवेदन

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