कभी तो ये गुरुवर
कभी तो ये गुरुवर
कभी तो ये गुरुवर, माँझी बन जाते हैं
कभी तो ये गुरुवर, साथी बन जाते हैं
अँगुली पकड़ मेरी, ये राह दिखाते हैं
तो बोलो न! कभी तो ये गुरुवर माँझी .............. ।
जो ठुकरा दिया तुमने, हम किससे बोलेंगे
दर तेरे खड़े होकर, छुप-छुप के रो लेंगे।
मेरे इस जीवन की बस एक तमन्ना है
तुम सामने हो मेरे और प्राण निकल जाएं।
कभी तो ये गुरुवर.....
गुरुदेव की महिमा को हम मिलके गाएंगे
इस चातुर्मास को हम सफल बनाएंगे
सुनते हैं तेरी रहमत दिन-रात बरसती है
एक बूँद जो मिल जाए किस्मत ही बदल जाए।
कभी तो ये गुरुवर.....
आँखों में बसाया है तुझे दिल से गाया है
मेरी हर धड़कन में बस तू ही समाया है
ठोकर लगी मुझको, पतवार नोकीला था
पर चोट ना आई, गुरुवर ने सम्हाला था।
कभी तो ये गुरुवर माँझी ............................. ।
।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
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