साधना के रास्ते
साधना के रास्ते
धुन - ए मेरे प्यारे वतन.......
साधना के रास्ते, आत्मा के वास्ते, चल रे राही चल।
मुक्ति की मंज़िल मिले, शांति के सरसिज खिलें,
चल रे राही चल......-2
ज्ञान नहीं, अज्ञान था, जो भटकते रहे हर जनम।
छल कपट माया में पड़, करते रहे हम हर करम।
राह हो कल्याण की, भवहरण भगवान की,
चल रे राही चल.....-2.
कौन है अपना यहाँ, किसको पराया हम कहें।
एक की आँखों में खुशियां, एक के आंसू बहें।
आत्म मंदिर में चलें, ज्योति से ज्योति मिले,
चल रे राही चल.......-2
सब यहाँ जीओ जगत में, जल में कमल सी ज़िन्दगी।
सत्य शिव सौंदर्य की, करते रहें हम बंदगी।
शेष सब निःशेष हो, हृदय का अभिषेक हो,
चल रे राही चल........-2
।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
द्वारा - सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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