साधना के रास्ते

साधना के रास्ते

धुन - ए मेरे प्यारे वतन.......

साधना के रास्ते, आत्मा के वास्ते, चल रे राही चल।

मुक्ति की मंज़िल मिले, शांति के सरसिज खिलें,

चल रे राही चल......-2

ज्ञान नहीं, अज्ञान था, जो भटकते रहे हर जनम।

छल कपट माया में पड़, करते रहे हम हर करम।

राह हो कल्याण की, भवहरण भगवान की,

चल रे राही चल.....-2.

कौन है अपना यहाँ, किसको पराया हम कहें।

एक की आँखों में खुशियां, एक के आंसू बहें।

आत्म मंदिर में चलें, ज्योति से ज्योति मिले,

चल रे राही चल.......-2

सब यहाँ जीओ जगत में, जल में कमल सी ज़िन्दगी।

सत्य शिव सौंदर्य की, करते रहें हम बंदगी।

शेष सब निःशेष हो, हृदय का अभिषेक हो,

चल रे राही चल........-2 

।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

द्वारा - सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

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