तू ज्ञान का सागर है

तू ज्ञान का सागर है




 तू ज्ञान का सागर है, आनन्द का सागर है

उसी आनन्द के प्यासे हमऽऽऽ।

निज ज्ञान सुधा चाखें, -2 प्रभु जी तेरी कृपा से हमऽऽऽ।। -2 

तू ज्ञान का सागर है..... -2 

विषय भोग में तन्मय होकर, खोया है जीवन वृथा।

बात प्रभु तेरी एक न मानी, अपनी ही धुन में रहा -2

जाना है किधर हमको, -2 और आए कहाँ से हमऽऽऽ।। -2

तू ज्ञान का सागर है.....-2

आतम अनुभव अमृत तजकर, पीया विषय जल क्षार।

मोह नींद में पागल होकर, किया न तत्व विचार-2

नैया है मेरी मँझधार, इसी से प्रभु को बुलाते हमऽऽऽ। -2 

तू ज्ञान का सागर है -2

भूल रहे हैं राह वतन की, भटक रहे मँझधार।

भीख मांगते दर दर भ्रमते, घर में भर भण्डार -2

निज धाम हमारा है, जाएं स्वदेश यहाँ से हमऽऽऽ। -2

तू ज्ञान का सागर है -2

।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

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