प्रभु दर्श कर

प्रभु दर्श कर



( चलते समय )

प्रभु दर्श कर आज घर जा रहे हैं ।

झुका तेरे चरणों में सर जा रहे हैं ॥ टेक

यहाँ से कभी दिल न जाने को करता ।

करें कैसे जाये बिना भी न सरता ।

अगरचे हृदय नैन भर आ रहे हैं ॥

हुई पूजा भक्ती न कुछ सेव काई ।

न मन्दिर में बहुमूल्य वस्तु चढ़ाई ।

यह खाली फकत जोर कर जा रहे हैं ॥

सुना तुमने तारे अधम चोर पापी ।

न धर्मी सही फिर भी तेरे हैं हामी ।

हमें भी तो करना पार जा रहे हैं ॥

बुलाना यहां फिर भी दर्शन को अपने ।

सुमत तुम भरोसे लगें कर्म हरने ।

जरा लेते रहना खबर जा रहे हैं ॥

। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

द्वारा -सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

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