कर्म की गति

कर्म की गति

कर्म की गति न्यारी रे भाई-2

चिट्ठिया हो तो हर कोई बाँचे, भाग्य न बाँचे कोय।

पल में सुख दे, पल में दुःख दे,

ये कर्मन की रीत-2 

बीती जाय सारी उमरिया-2, 

दिन पर दिन ढल जाये, कर्म की गति न्यारी रे भाई-2

चार दिनों की है ज़िंदगानी, हर पल बीती जाये, -2

कुछ तो ऐसा कारज कर ले, जीवन सफल हो जाये।

 कर्म की गति न्यारी रे भाई-2

अब तो चेत सयाने नर तन, बार-बार नहीं पाये-2

इस चक्कर में क्यों तू फंसा रे, नेहा प्रभु से लगाये।

कर्म की गति न्यारी रे भाई-2

चिट्ठिया हो तो हर कोई बाँचे, भाग्य न बाँचे कोय।

।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

द्वारा - सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

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