आरती
आरती
तर्ज :— आरती
ओं जय जय श्री महावीर, -2
त्रिशला नंदन स्वामी, दिखलाओ भवतीर ॥ (ध्रुव)
कुण्डलपुर में तेरा, शुभ दिन जन्म हुआ, स्वामी....
पावापुरी पावास में, तव निर्वाण हुआ — ओं जय......॥१॥
ज्ञान का स्रोत बहाकर, सब की प्यास हरो, स्वामी...
छाया घोर अंधेरा, दिव्य प्रकाश करो, ओं जय......॥२॥
तू जीवन की ज्योति, तू घट घट ज्ञाता, स्वामी....
भाग्य विधाता तू ही, तू ही सुखदाता, ओं जय.........॥३॥
लीन रहे अपने में, ऐसा शुभवर दो, स्वामी...
संकट मोचक तू ही, सब संकट हर दो, ओं जय.........॥४॥
हमको दिखा दो शिवपुर, सविनय अर्ज करें, स्वामी...
"मुनि कन्हैया" स्थिर मन, तेरा ध्यान धरें — ओं जय...॥५॥
। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
द्वारा -सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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