है दुर्लभ ज्ञान
है दुर्लभ ज्ञान
चाल—यह कैसे बाल बिखरे हैं यह क्यों सूरत बनी गम की ।
है दुर्लभ ज्ञान दुनिया में, धरम सब से अमोलक है
यही भगवान ने भाषा, धरम सब से अमोलक है ॥टेक॥
रखो तन अपना धन देकर, बचाओ लाज तन देकर
धरम पर वार दो सब कुछ, धरम सब से अमोलक है ॥टेक॥
धरम के सामने सब हेय, है सामान दुनिया का
धरम ही सार है जग में, धरम सब से अमोलक है ॥टेक॥
धरम के वास्ते सीता, किया परवेश अगनी में
गये बन राज तज रघुवर, धरम सबसे अमोलक है ॥टेक॥
धरम के वास्ते गर जान भी, जाये तो दे दीजे
समझ लीजे यकीं कीजे, धरम सब से अमोलक है ॥टेक॥
। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
द्वारा -सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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