नहीं काबू में आता है

भजन - नहीं काबू में आता है



चाल—कहां ले जाऊं दिल दोनों जहां में इसकी मुश्किल है

नहीं काबू में आता है दिले नादान क्या कीजे

इसे काबू में लाने का कहो सामान क्या कीजे—टेक

कभी विषयों में जाता है, कभी भोगों में आता है

कहीं टिकता नहीं मूरख निपट नादान क्या कीजे—टेक

जुबां पर ख्वाहिशें लाखों, हजारों आरजू दिल में

मगर होते नहीं पूरे, कभी अरमान क्या कीजे—टेक

न्यायमत दिल को समझाओ, करे सन्तोष दुनिया में

बिना इसके नहीं चारा, अरे अज्ञान क्या कीजे—टेक

। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

द्वारा -सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

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