प्रभु वीत रागी

भजन- प्रभु वीत रागी




**चाल**— विपत में सनम के संभाली कमलिया

प्रभु वीत रागी हितंकर तू ही है

तू ही कृपा सिन्धु दयाकर तू ही है ॥

चराचर का हामी तू ही सबका स्वामी

परोपकारता का समन्दर तू ही है ॥

अहिंसा का पैगाम तू ने सुनाया

बिलाशक जगत का जिनेश्वर तू ही है ॥

न रागी न द्वेषी तुझे सब बराबर

हितेषी जहां में सरासर तुही है ॥

तू है सच्चिदानन्द कल्याण रूपी

अवश्य सतगुणों का हां सागर तुही है ॥

अपूरब दया मय है वाणी तुम्हारी

मुकत जाने वालों का रहबर तू ही है ॥

अन्धेरा जहालत का तू ने हटाया

सिदाकत का बेशक दिवाकर तू ही है ॥

धरम का धुरन्धर है शिव मग का नेता

तू ही सार है सबसे बेहतर तू ही है ॥

लगा मुझ को रस्ते कि भूला फिरूं हूं

शरण हूं में तेरी कि बर तर तू ही है ॥

। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

द्वारा -सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

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