प्यारी दुनिया है

भजन-प्यारी दुनिया है




चाल— (कवाली) कोई चतुर ऐसी सखी न मिली

प्यारी दुनिया है सागर दु:खों से भरा

या में सुख कहीं आता नजर ही नहीं

या में मोह का जाल पड़ा है सती

या में जीव फंसे हों खबर ही नहीं ॥टेक॥

कौन माता पिता कौन बन्धु सुता

कैसे भाई बहिन कैसे दारा पति

इस दुनिया के नाते हैं झूठे सभी

सच पूछो तो रहने का घर ही नहीं ॥टेक॥

नदी नाव संजोग से आके मिले

जैसे पेड़ पे पंखी बसेरा करे

जब भोर भई सब बिछड़ के चले

संग चलने का कोई ज़िकर ही नहीं ॥टेक॥

रानी स्वारथ की सारी है दुनिया लखो

या में भूल के कोई न नेह करो

सूखे दरिया पे नर पशु पंछी कोई

देखो करता है आके गुजर ही नहीं ॥टेक॥

चाहे फौज प्यादे हजारों रहो

चाहे महल किले में जा बंद करो

चाहे जंतर मंतर लाखों पढ़ो

मौत टारी किसी से भी टरती नहीं ॥टेक॥

धन दौलत राज खजाना सभी

कोई अन्त समय काम आवे नहीं

आ मुसीबत में कोई सहाई करे

ऐसा कोई भी सुर या असुर ही नहीं ॥टेक॥

ऐसा जान के प्यारी विचार करो

दु:ख शोक तजो समता को भजो

मोह माया को मन सेती दूर करो

मोह करने का अच्छा समर ही नहीं ॥

जिन राज भजो मन धीर धरो

तप सयंम शील सिंगार करो

धर ध्यान निज आतम कर्म हरो

बिन धर्म के होगा गुजर ही नहीं ॥टेक॥

। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

द्वारा -सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

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