सदा सन्तोष कर प्राणी
भजन- सदा सन्तोष कर प्राणी
वही धनवान है जग में लोभ जिसके नहीं मन में
वह निर्धन रंक होता है जो परधन को हरा चाहे—टेक
दुखी रहते हैं वह निशदिन, जो आरत ध्यान करते हैं
न कर लालच अगर आजाद रहने का मजा चाहे—टेक
बिना मांगे मिले मोती, न्यायमत देख दुनिया में
भीख मांगी नहीं मिलती, अगर कोई गदा चाहे—टेक
। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
द्वारा -सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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