तेरे चरणों में
तेरे चरणों में
( तर्ज—तेरे कूँचे में अरमानों की दुनियाँ लेके आया हूँ—फिल्म दिल्लगी ) तेरे चरणों में अय भगवन् ये आशा लेके आया हूँ । सुधर जाये मेरा जीवन यह इच्छा लेके आया हूँ ॥ टेक ॥ न आये भाव हिंसा का वचन हितकर सदा बोलूँ, शील सन्तोष मय जीवन की वांछा लेके आया हूँ ॥ १ सभी से प्रेम हो मेरा नहीं हो द्वेष दुष्टों से, भाव दु:खियों पे मैं अपना दया का लेके आया हूँ ॥ २ काम अरु क्रोध की अग्नि मेरी हो शांत हे भगवन्, लोभ मद मोह मर्दन की सुचिंता लेके आया हूँ ॥ ३ रहे नित भाव समता का न ममता हो मुझे पर से, सफल शिवराम हो मन की कामना लेके आया हूँ ॥ ४
। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
द्वारा -सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
विनम्र निवेदन
यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें।
धन्यवाद
Comments
Post a Comment