तेरे चरणों में

तेरे चरणों में



( तर्ज—तेरे कूँचे में अरमानों की दुनियाँ लेके आया हूँ—फिल्म दिल्लगी ) तेरे चरणों में अय भगवन् ये आशा लेके आया हूँ । सुधर जाये मेरा जीवन यह इच्छा लेके आया हूँ ॥ टेक ॥ न आये भाव हिंसा का वचन हितकर सदा बोलूँ, शील सन्तोष मय जीवन की वांछा लेके आया हूँ ॥ १ सभी से प्रेम हो मेरा नहीं हो द्वेष दुष्टों से, भाव दु:खियों पे मैं अपना दया का लेके आया हूँ ॥ २ काम अरु क्रोध की अग्नि मेरी हो शांत हे भगवन्, लोभ मद मोह मर्दन की सुचिंता लेके आया हूँ ॥ ३ रहे नित भाव समता का न ममता हो मुझे पर से, सफल शिवराम हो मन की कामना लेके आया हूँ ॥ ४

। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

द्वारा -सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

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