तेरी सूरत

तेरी सूरत


धुन - मैंने सारे सहारे छोड़ दिए.....

दुनियाँ में तेरी सूरत से कहो, बढ़ के कोई सूरत क्या होगी।

ऐ वीर! तेरी मूरत से अलग इक, शान्ति की मूरत क्या होगी॥ टेक॥

है राग नहीं और द्वेष नहीं, और क्रोध नहीं जिनके मन में।              

 है मान नहीं और माया नहीं, और लोभ नहीं जिनके मन में

निर्भय जो बने, हथियार की तो फिर, उनको जरूरत क्या होगी॥१॥

है दृष्टि धरी नासा पे जब, तुमने धारा है पद्माासन।

और हाथ पे हाथ रखा तुमने, और किया नहीं कोई साधन॥

मोह कर्म है चकनाचूर किया, इन से बड़ी ताकत क्या होगी॥२॥

जो ध्यान धरे तेरा प्रभु जी, वह तुम सा ही हो जाता है।

मिलती है उस को मोक्ष रमा, और अजर अमर पद पाता है॥

‘शिवराम’ उसे दरकार कहो, संसार की दौलत क्या होगी॥३॥

 । ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

द्वारा -सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

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