ऐसे बालक
भजन
'बहिन गुण माला कृत' (गुलशन सुमन)
ऐसे बालक वीर बनें हम—
नहीं किसी से कभी डरें हम
रखें सभी से मैत्री भारी
मित्र बनायें दुनिया सारी—
सद् इच्छा हो पूर्ण हमारी
समझें सब को अपने ही संग—
ऐसे बालक वीर बने हम
देश प्रेम को लक्ष्य बनायें—
भारत को समृद्ध बनायें
सत्य धर्म को सखा बनायें—
अपने वचनों पर मिट जायें।
दुनिया में आदर्श बनें हम—
ऐसे बालक वीर बनें हम ।
सेवा भाव सभी से रखें—
विश्व प्रेम का अमृत चखें ।
ईर्ष्या भाव कभी नहीं रखें—
ऐसे भाव दिलों में रखें ।
अनुचित अभिमानी न बनें हम—
ऐसे बालक वीर बनें हम ।
विचलित हों न कभी सत्पथ से—
भय खावें न कभी संकट से ।
बन अभिमन्यु अरु लव कुश से—
कार्य करें जगती पर उन से ।
जग में कीर्ति-प्रसार करें हम—
ऐसे बालक वीर बनें हम ।
नहीं बिसारें ईश भजन को—
तज दें निन्दा कटु भाषण को ।
करें पिता माता की सेवा—
सेवा से बढ़ कर नहीं मेवा ।
जावें कभी कुराह न किं वा—
दृढ़तम बनें विचार हमेशा ।
आत्मोन्नति का मार्ग कहें हम—
"माला" ऐसे वीर बनें हम
। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
द्वारा -सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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