जिया राग भाव
भजन - जिया राग भाव
(चाल - सोरठ - अधिक सरूप रूप का दिया न जागा मोल)
जिया राग भाव दुखदाई, राग को मन से हटाओ जी
मन से हटाओ जी, राग को मन से हटाओ जी - टेक
है राग निमित संसार करम का मूल बताओ जी
जो चाहो हो परमानन्द भाव वैराग बनाओ जी - टेक
यह राग चिकट सम जान भूल इस रस्ते न जावो जी
लग जावेगी कर्मों की धूल ज्ञान दामन को बचावो जी - टेक
अब पर परिणति को छोड़ ध्यान आपे में जमावो जी
न्यामत तजराग अरु द्वेष सदा आतम गुण गावो जी - टेक
। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
द्वारा -सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
विनम्र निवेदन
यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें।
धन्यवाद
Comments
Post a Comment