तोरा मन दर्पण
तोरा मन दर्पण
तोरा मन दर्पण कहलाए -2
भले बुरे सारे कर्मों को, देखे और दिखाए -टेक
मन ही देवता मन ही ईश्वर, मन से बड़ा न कोय
मन उजियारा जब जब फैले, जग उजियारा होय
इस उजले दर्पण पर प्राणी, धूल न जमने पाये—टेक
सुख की कलियां दुख के कांटे मन सब का आधार
मन से कोई बात छुपे ना मन के नयन हज़ार
जग से चाहे भाग ले कोई, मन से भाग न पाये
तन की दौलत ढलती छाया, मन का धन अनमोल
तन के कारण मन के धन को मत माटी में रोल
मन की कदर भुलाने वाला हीरा जन्म गवांये—टेक
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। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
द्वारा -सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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