कहां हो बता दो

 कहां हो बता दो


तर्ज—कहां हो बता दो, कहाँ हो बता दो—
 


कहाँ हो बतादो, महावीर स्वामी

शरण में तिहारी हरो दुख भारी—कहाँ हो बतादो

अधम हूँ मैं मुझ को मार्ग दिखादो

चरण में तेरी हूँ, हरो दु:ख भारी—कहाँ हो बतादो

काम और क्रोध के वश में मैं आया

मान और माया ने मुझको है घेरा

इससे बचाना है, लोभ अति भारी—कहाँ हो बतादो

राग और द्वेष के चक्कर में आया

कर्म किये जो उन्हीं ने डुबोया

'देव' का अन्धेर, आके मिटाजा—कहाँ हो बतादो




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