घर-घर दीप जले
घर-घर दीप जले
प्रभु महावीर चले, प्रभु महावीर चले।
घर-घर दीप जले, घर-घर दीप जले।
राजगद्दी छोड़ी, भूख प्यास तोड़ी।
दीन-दुःखियों की तड़पन, मिटाते चले-२
सब ललकार उठे, मेरे महावीर चले।
घर-घर दीप.....
रात अमावस की थी, चमकी बिजली भी थी।
सारी दुनिया जगा के, गगन पे चले-२
उनका जीवन भला, समता रस से भरा
महामंत्र अहिंसा का देकर चले-२ आऽ आऽऽ
प्रभु गौतम जी कहें, प्रभु पावा से चले-२
घर-घर दीप.....
तप-तपते गये, ध्यान अग्नि जले।
सारे कर्मों की होली, जलाकर चले-२
धर्म चक्र फिरा, गुन गुनाई सभा।
जियो जीने दो नारा, लगाकर चले आऽ आऽऽ
इस धरती से उठे, भव बन्धन से छुटे-२
घर-घर दीप.....
।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
द्वारा -सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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